मंगलवार, 12 जुलाई 2016

प्राचीन भारत के प्रमुख शास्त्र

!!!---: प्राचीन भारत के प्रमुख शास्त्र :---!!!
===============================

प्राचीन समय में न आफसेट प्रिंटिंग की मशीने थीं, न स्क्रिन प्रिटिंग की। न ही इंटरनेट था. जहां किसी भी विषय पर असंख्य सूचनाएं उपलब्ध होती हैं। फिर भी प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों ने अपने पुरुषार्थ, ज्ञान और शोध की मदद से कई शास्त्रों की रचना की और उसे विकसित भी किया। इनमें से कुछ प्रमुख शास्त्रों का विवेचन प्रस्तुत है-

(1.) आयुर्वेदशास्त्र
===================

आयुर्वेद शास्त्र का विकास उत्तरवैदिक काल में हुआ। इस विषय पर अनेक स्वतंत्र ग्रंथों की रचना हुई। भारतीय परंपरा के अनुसार आयुर्वेद के प्रथम प्रवक्ता ब्रह्मा थे । ब्रह्मा ने इसका ज्ञान सर्वप्रथम प्रजापति को दिया, प्रजापति ने अश्विनी कुमारों को और फिर अश्विनी कुमारों ने इस विद्या को इन्द्र को प्रदान किया। इन्द्र के द्वारा ही यह विद्या सम्पूर्ण लोक में विस्तारित हुई। यह ऋग्वेद का उपवेद है ।

कुछ विद्वानों के अनुसार यह ऋग्वेद का उपवेद है तो कुछ का मानना है कि यह ‘अथर्ववेद’ का उपवेद है। आयुर्वेद की मुख्य तीन परम्पराएं हैं- भारद्वाज, धनवन्तरि और काश्यप। आयुर्वेद विज्ञान के आठ अंग हैं- शल्य, शालाक्य, कायचिकित्सा, भूतविधा, कौमारमृत्य, अगदतन्त्रा, रसायन और वाजीकरण। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, काश्यप संहिता इसके प्रमुख ग्रंथ हैं, जिन पर बाद में अनेक विद्वानों द्वारा व्याख्याएं लिखी गईं।

आयुर्वेद के सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ चरकसंहिता के बारे में ऐसा माना जाता है कि मूल रूप से यह ग्रन्थ आत्रेय पुनर्वसु के शिष्य अग्निवेश ने लिखा था। चरक ऋषि ने इस ग्रन्थ को संस्कृत में रूपांतरित किया। इस कारण इसका नाम चरक संहिता पड़ गया। बताया जाता है कि पतंजलि ही चरक थे। इस ग्रन्थ का रचनाकाल ईं. पू. पांचवी शताब्दी माना जाता है।

(2.) रसायनशास्त्र
===============

रसायनशास्त्र का प्रारंभ वैदिक युग से माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में रसायनशास्त्र के ‘रस’ का अर्थ होता था-पारद। पारद को भगवान शिव का वीर्य माना गया है। रसायनशास्त्र के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के खनिजों का अध्ययन किया जाता था। वैदिक काल तक अनेक खनिजों की खोज हो चुकी थी तथा उनका व्यावहारिक प्रयोग भी होने लगा था। परंतु इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम नागार्जुन नामक बौद्ध विद्वान ने किया। उनका काल लगभग 280-320 ई. था। उन्होंने एक नई खोज की, जिसमें पारे के प्रयोग से तांबा इत्यादि धातुओं को सोने में बदला जा सकता था।

रसायनशास्त्र के कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों में एक है रसरत्नाकर। इसके रचयिता नागार्जुन थे। इसके कुल आठ अध्याय थे, परंतु सम्प्रति चार ही प्राप्त होते हैं। इसमें मुख्यत: धातुओं के शोधन, मारण, शुद्ध पारद प्राप्ति तथा भस्म बनाने की विधियों का वर्णन मिलता है।

प्रसिद्ध रसायनशास्त्री श्री गोविन्द भगवतपाद जो शंकराचार्य के गुरु थे, द्वारा रचित ‘रसहृदयतन्त्र’ ग्रंथ भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा रसेन्द्रचूड़ामणि, रसप्रकाशसुधाकर रसार्णव, रससार आदि ग्रन्थ भी रसायनशास्त्र के ग्रन्थों में ही गिने जाते हैं।

(3.) ज्योतिषशास्त्र
============

ज्योतिष वैदिक साहित्य का ही एक अंग है। इसमें सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी, नक्षत्र, ऋतु, मास, अयन आदि की स्थितियों पर गंभीर अध्ययन किया गया है। इस विषय में हमें ‘वेदांग ज्योतिष’ नामक ग्रंथ प्राप्त होता है। इसके रचना का समय 1200 ई. पू. माना गया है। आर्यभट्ट ज्योतिष गणित के सबसे बड़े विद्वान के रूप में माने जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार इनका जन्म 476 ई. में पटना (कुसुमपुर) में हुआ था। मात्र 23 वर्ष की उम्र में इन्होंने ‘आर्यभट्टीयम्’ नामक प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में पूरे 121 श्लोक हैं। इसे चार खण्डों में बांटा गया है- गीतिकापाद, गणितपाद, कालक्रियापाद और गोलपाद। विदित रहे कि प्राच्य ज्योतिष् का अभिप्राय खगोलीय ज्ञान और गणित विद्या था । आधुनिक काल में इस ज्योतिष् का अभिप्राय फलित विद्या लिया जाने लगा है । इसके प्रमुख आचार्य लगध माने जाते हैं ।

वराहमिहिर के उल्लेख के बिना तो भारतीय ज्योतिष की चर्चा अधूरी है। इनका समय छठी शताब्दी ई. के आरम्भ का है। इन्होंने चार प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की- पंचसिद्धान्तिका, बृहज्जातक, बृहदयात्रा तथा वृहत्संहिता जो ज्योतिष को समझने में मदद करती हैं।

(4.) गणितशास्त्र
===============

प्राचीन काल से ही भारत में गणितशास्त्र का विशेष महत्व रहा है। यह सभी जानते हैं कि शून्य एवं दशमलव की खोज भारत में ही हुई। यह भारत के द्वारा विश्व को दी गई अनमोल देन है। इस खोज ने गणितीय जटिलताओं को खत्म कर दिया। गणितशास्त्र को मुख्यत: तीन भागों में बांटा गया है। अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित।

वैदिक काल में अंकगणित अपने विकसित स्वरूप में स्थापित था। ‘यजुर्वेद’ में एक से लेकर 10 खरब तक की संख्याओं का उल्लेख मिलता है। इन अंकों को वर्णों में भी लिखा जा सकता था।

बीजगणित का साधारण अर्थ है, अज्ञात संख्या का ज्ञात संख्या के साथ समीकरण करके अज्ञात संख्या को जानना। अंग्रेजी में इसे ही अलजेब्रा कहा गया है। भारतीय बीजगणित के अविष्कार पर विवाद था। कुछ विद्वानों का मानना था इसके अविष्कार का श्रेय यूनानी विद्वान दिये फान्तस को है। परंतु अब यह साबित हो चुका है कि भारतीय बीजगणित का विकास स्वतंत्र रूप से हुआ है और इसका श्रेय भारतीय विद्वान आर्यभट्ट (446 ई.) को जाता है।

रेखागणित का अविष्कार भी वैदिक युग में ही हो गया था। इस विद्या का प्राचीन नाम है- शुल्वविद्या या शुल्वविज्ञान। अनेक पुरातात्विक स्थलों की खुदाई में प्राप्त यज्ञशालाएं, वेदिकाएं, कुण्ड इत्यादि को देखने तथा इनके अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि इनका निर्माण रेखागणित के सिद्धांत पर किया गया है। ब्रह्मस्फुट सिद्धांत, नवशती, गणिततिलक, बीजगणित, गणितसारसंग्रह, गणित कौमुदी इत्यादि गणित शास्त्र के प्रमुख ग्रन्थ हैं।

(5.) कामशास्त्र
=================

भारतीय समाज में पुरुषार्थ का काफी महत्व है। पुरुषार्थ चार हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। काम का इसमें तीसरा स्थान है। सर्वप्रथम नन्दी ने 1000 अध्यायों का ‘कामशास्त्र’ लिखा, जिसे बाभ्रव्य ने 150 अध्यायों में संक्षिप्त रूप में लिखा। कामशास्त्र से संबंधित सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कामसूत्र’ जिसकी रचना वात्स्यायन ने की थी। इस ग्रंथ में 36 अध्याय हैं, जिसमें भारतीय जीवन पद्धति के बारे में बताया गया है। इसमें 64 कलाओं का रोचक वर्णन है। इसके अलावा एक और प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कुहनीमत’ जो एक लघुकाव्य के रूप में है। कोक्कक पंडित द्वारा रचित रतिरहस्य को भी बेहद पसंद किया जाता है।

(6.) संगीतशास्त्र
==============


भारतीय परंपरा में भगवान शिव को संगीत तथा नृत्य का प्रथम अचार्य कहा गया है। कहा जाता है के नारद ने भगवान शिव से ही संगीत का ज्ञान प्राप्त किया था। इस विषय पर अनेक ग्रंथ प्राप्त होते हैं जैसे नारदशिक्षा, रागनिरूपण, पंचमसारसंहिता, संगीतमकरन्द आदि।

संगीतशास्त्र के प्रसिद्ध आचार्यों में मुख्यत: उमामहेश्वर, भरत, नन्दी, वासुकि, नारद, व्यास आदि की गिनती होती है। भरत के नाटयशास्त्र के अनुसार गीत की उत्पत्ति जहां सामवेद से हुई है, वहीं यजुर्वेद ने अभिनय (नृत्य) का प्रारंभ किया।

(7.) धर्मशास्त्र
==============

प्राचीन काल में शासन व्यवस्था धर्म आधारित थी। प्रमुख धर्म मर्मज्ञों वैरवानस, अत्रि, उशना, कण्व, कश्यप, गार्ग्य, च्यवन, बृहस्पति, भारद्वाज आदि ने धर्म के विभिन्न सिद्धांतों एवं रूपों की विवेचना की है। पुरुषार्थ के चारों चरणों में इसका स्थान पहला है।

उत्तर काल में लिखे गये संग्रह ग्रंथों में तत्कालीन समय की सम्पूर्ण धार्मिक व्यवस्था का वर्णन मिलता है। स्मृतिग्रंथों में मनुस्मृति, याज्ञवल्कय स्मृति, पराशर स्मृति, नारदस्मृति, बृहस्पतिस्मृति में लोकजीवन के सभी पक्षों की धार्मिक दृष्टिकोण से व्याख्या की गई है तथा कुछ नियम भी प्रतिपादित किये गये हैं।

(8.) अर्थशास्त्र
==============


चार पुरुषार्थो में अर्थ का दूसरा स्थान है। महाभारत में वर्णित है कि ब्रह्मा ने अर्थशास्त्र पर एक लाख विभागों के एक ग्रंथ की रचना की। इसके बाद शिव (विशालाक्ष) ने दस हजार, इन्द्र ने पांच हजार, बृहस्पति ने तीन हजार, उशनस ने एक हजार विभागों में इसे संक्षिप्त किया।

अर्थशास्त्र के अंतर्गत केवल वित्त संबंधी चर्चा का ही उल्लेख नहीं किया गया है। वरन राजनीति, दण्डनीति और नैतिक उपदेशों का भी वृहद वर्णन मिलता है। अर्थशास्त्र का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है कौटिल्य का अर्थशास्त्र। इसकी रचना चाणक्य ने की थी। चाणक्य का जीवन काल चतुर्थ शताब्दी के आस-पास माना जाता है।

कौटिल्य अर्थशास्त्र में धर्म, अर्थ, राजनीति, दण्डनीति आदि का विस्तृत उपदेश है। इसे 15 अधिकरणों में बांटा गया है। इसमें वेद, वेदांग, इतिहास, पुराण, धार्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, ज्योतिष आदि विद्याओं के साथ अनेक प्राचीन अर्थशास्त्रियों के मतों के साथ विषय को प्रतिपादित किया गया है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ है कामन्दकीय नीतिसार, नीतिवाक्यामृत, लघुअर्थनीति इत्यादि।

(9.) प्रौद्योगिकी ग्रन्थ
==================

'भृगुशिल्पसंहिता' में १६ विज्ञान तथा ६४ प्रौद्योगिकियों का वर्णन है। इंजीनियरी प्रौद्योगिकियों के तीन 'खण्ड' होते थे। 'हिन्दी शिल्पशास्त्र' नामक ग्रन्थ में कृष्णाजी दामोदर वझे ने ४०० प्रौद्योगिकी-विषयक ग्रन्थों की सूची दी है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित हैं-

विश्वमेदिनीकोश,
शंखस्मृति,
शिल्पदीपिका,
वास्तुराजवल्लभ,
भृगुसंहिता,
मयमतम्,
मानसार,
अपराजितपृच्छा,
समरांगणसूत्रधार,
कश्यपसंहिता,
वृहतपराशरीय-कृषि,
निसारः,
शिगृ,
सौरसूक्त,
मनुष्यालयचंद्रिका,
राजगृहनिर्माण,
दुर्गविधान,
वास्तुविद्या,
युद्धजयार्णव।

प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित १८ प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में से 'कश्यपशिल्पम्' सर्वाधिक प्राचीन मानी जाती है।

प्राचीन खनन एवं खनिकी से सम्बन्धित संस्क्रित ग्रन्थ हैं- 'रत्नपरीक्षा', लोहार्णणव, धातुकल्प, लोहप्रदीप, महावज्रभैरवतंत्र तथा पाषाणविचार।

'नारदशिल्पशास्त्रम' शिल्पशास्त्र का ग्रन्थ है।

(10.) अन्य शास्त्र
=================

न्यायशास्त्र, योगशास्त्र, वास्तुशास्त्र, नाट्यशास्त्र, काव्यशास्त्र, अलंकारशास्त्र, नीतिशास्त्र आदि।
==============================
===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(18.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(17.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(18.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(19.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/

प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी

!!!---: प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी :---!!!
========================================

जो अज्ञानी लोग कुतर्क करते हैं और संस्कृत को मृत-भाषा सिद्ध करने का असफल प्रयास करते हैं, उनकी आँखें खोल देने वाली यह पोस्ट है । पढिए और देखिए कि संस्कृत में कितना ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी है । दुनियाँ में सर्व प्रथम संस्कृत ने ही शून्य दिया, संस्कृत ने ही दशमलव पद्धति दी, संस्कृत ने ही गणित में पाई का आविष्कार दिया, संस्कृत ने ही गति के नियम दिए, संस्कृत ने ही गणित , अंक-गणित, बीज-गणित, क्षेत्रमिति, वैदिक-गणित आदि दिया । संस्कृत ने ही सर्व प्रथम बताया कि सूर्य नहीं अपितु पृथिवी सूर्य का चक्कर लगाती है । संस्कृत ने ही सर्वप्रथम खगोल-विज्ञान, जीव-विज्ञान, भौतिकी-विज्ञान और रसायन-विज्ञान दिया । संस्कृत ने कृषि-विज्ञान दिया । आइए जाने कि संस्कृत वाङ्मय ने क्या-क्या दियाः---

प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक को जानने के लिये पुरातत्व और प्राचीन साहित्य का सहारा लेना पडता है। प्राचीन भारत का साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधतासम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, व्याकरण आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, सैन्य विज्ञान आदि भी वर्ण्यविषय रहे हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्राचीन भारत के कुछ योगदान निम्नलिखित हैं :---

(1.) गणित :--- वैदिक साहित्य शून्य के कांसेप्ट, बीजगणित की तकनीकों तथा कलन-पद्धति, वर्गमूल, घनमूल के कांसेप्ट से भरा हुआ है।

(2.) खगोलविज्ञान :--- ऋग्वेद (2000 ईसापूर्व) में खगोलविज्ञान का उल्लेख है।

(3.) भौतिकी :---६०० ईसापूर्व के भारतीय दार्शनिक ने परमाणु एवं आपेक्षिकता के सिद्धान्त का स्पष्ट उल्लेख किया है।

(4.) रसायन विज्ञान :---इत्र का आसवन, गन्दहयुक्त द्रव, वर्ण एवं रंजकों (dyes and pigments) का निर्माण, शर्करा का निर्माण

(5.) आयुर्विज्ञान एवं शल्यकर्म :--- लगभग ८०० ईसापूर्व भारत में चिकित्सा एवं शल्यकर्म पर पहला ग्रन्थ का निर्माण हुआ था।

(6.) ललित कला :---वेदों का पाठ किया जाता था जो सस्वर एवं शुद्ध होना आवश्यक था। इसके फलस्वरूप वैदिक काल में ही ध्वनि एवं ध्वनिकी का सूक्ष्म अध्ययन आरम्भ हुआ।

(7.) यांत्रिक एवं उत्पादन प्रौद्योगिकी :--- ग्रीक इतिहासकारों ने लिखा है कि चौथी शताब्दी ईसापूर्व में भारत में कुछ धातुओं का प्रगलन (स्मेल्टिंग) की जाती थी।

(8.) सिविल इंजीनियरी एवं वास्तुशास्त्र - मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा से प्राप्त नगरीय सभयता उस समय में उन्नत सिविल इंजीनियरी एवं आर्किटेक्चर के अस्तित्व कको प्रमाणित करती है।

(9.) जलयान-निर्माण एवं नौवहन (Shipbuilding & navigation) :---संस्कृत एवं पालि ग्रन्थों में सामुद्रिक क्रियाकलापों के अनेक उल्लेख मिलते हैं।



(10.) खेल (Sports & games) :--- शतरंज, लुडो, साँप-सीढ़ी एवं ताश के खेलों का जन्म प्राचीन भारत में ही हुआ।

==============================
===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(18.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(17.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(18.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(19.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/

सोमवार, 11 जुलाई 2016

एनसीईआरटी संस्कृत को लोकप्रिय बनायेगी

!!!---: एनसीईआरटी संस्कृत को लोकप्रिय बनायेगी :---!!!
========================================

शिक्षा-शास्त्री और प्रोफेशनल संस्कृत के छात्र तैयार हो जाएँ, नई भर्तियों के लिए, वैकेंसी के लिए ।

मानव संसाधन विकास मन्त्रालय, (भारत सरकार) देश भर में संस्कृत को बढावा देने के लिए पाँच लाख संस्कृत शिक्षकों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकालने वाला है ।

विदित रहे कि मानव संसाधन विकास मन्त्रालय ने एनसीआरटी को कहा है कि संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष उपाय करें, पाठ्यक्रम तैयार करें और नए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का भी पाठ्यक्रम तैयार करें ।

आने वाले कुछ ही समय में राष्ट्रिय माध्यमिक शिक्षा अभियान और सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत पाँच लाख शिक्षकों की भर्ती की जाएगी । ये एनसीआरटी द्वारा प्रशिक्षित शिक्षक होंगे ।

ज्ञातव्य हो कि एनसीआरटी छात्रों में संस्कृत के प्रति रुचि जागृत हो , इसके लिए प्रयास कर रही है ।

मानव संसाधन विकास मन्त्रालय ने एनसीआरटी से केवल तीन महीने में रिपोर्ट तैयार करके देने के लिए कहा है ।

ऐसे विशेष पाठ्यक्रम के लिए संस्कृत के छात्र तैयार रहे । अपने अन्दर के ज्ञान की भूख को बढाएँ और सामान्य ज्ञान में वृद्धि करें ।

हमने आप सबके लिए विशेष योजना बनाई है कि नई भर्ती के लिए विशेष पोस्ट लिखी जाएँ , जिनमें देश-विदेश की सामान्य जानकारी से आप सबको अवगत कराया जाए, जिससे आप अपनी विशेष तैयारी कर सकें और इसके आधार पर आपको नई नौकरी मिल सकें ।

आइए हम सब मिलकर संस्कृत को बढावा दें ।

जयतु संस्कृतम्



जयतु भारतम् ।।

==============================
===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(18.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(17.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(18.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(19.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/

चीन में बढने लगी संस्कृत भाषा की लोकप्रियता...

चीन में बढने लगी संस्कृत भाषा की लोकप्रियता...
===================================

योग की लोकप्रियता से बढी संस्कृत सीखने की चाहत !
=========================

धीरे-धीरे पूरी दुनिया में संस्कृत छा रही है । नीदरलैण्ड में शुरुआत हो चुकी है । वहाँ की सरकार ने अपने विद्यालयों में पाँचवी कक्षा से ही गीता पढाने की अनुमति दे दी है । उधर ब्रिटेन में अधिकांश विद्यालयों में संस्कृत पढाई जाती है । इधर हमारे पडोसी देश चीन में लोग संस्कृत सीखना चाहते हैं ।

वामपंथी शासनवाले मुल्क चीन की नई पीढी में भारत की प्राचीन भाषा
संस्कृत की लोकप्रियता बढ रही है। बीजिंग के बौद्ध संस्थान के
ग्रीष्मकालीन शिविर (समर कैंप) में ६० लोगों ने संस्कृत पढऩे के लिए
नामांकन कराया है। विद्वान, योगाचार्य के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में
कार्यरत पेशेवर लोग धर्म और योग को बेहतर ढंग से समझने के लिए संस्कृत
भाषा सीखना चाहते हैं।

ग्रीष्मकालीन शिविर के लिए ३०० लोगों के समूह से इन प्रशिक्षुओंको चुना
गया है। इन में योगाचार्य, मैकेनिकल डिजाइनर, कार्यक्रम प्रस्तोता
(परफॉर्मर), होटल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षक के क्षेत्र में कार्यरत
लोग शामिल हैं। ये लोग पूर्वी चीन के हांगजोऊ बौद्ध संस्थान में छह दिन
तक संस्कृत का अध्ययन करेंगे। इस दौरान पढऩे और लिखने पर खास ध्यान दिया  जाएगा।

जर्मनी के माइंज विवि से इंडोलॉजी में डॉक्टरेट करने वाले ली वी
प्रशिक्षुओं को संस्कृत भाषा पढाएंगे। ली के मुताबिक, संस्कृत की व्याकरण
बहुत जटिल है। वर्तमान काल के लिए ही एक क्रिया का ७२ तरीके से प्रयोग
होता है। (वैसे ये विशेषता है )।

ऐसे चीन पहुंची संस्कृत
=========================

छठी शताब्दी में प्रख्यात बौद्ध भिक्षु जुआन जांग ने भारत की यात्रा की
थी और वे १७ बरस तक भारत में रहे। उन्ही के जरिये संस्कृत भाषा चीन
पहुंची। इस के बाद कई और भिक्षुओं ने भारत की यात्रा की और प्राचीन भारतीय
चिकित्सा पद्धति का ज्ञान अर्जित किया।

पीकिंग विवि में संस्कृत विभाग
=========================

चीन की पीकिंग यूनिवर्सिटी में संस्कृत के लिए एक अलग विभाग है जिस में
६० से अधिक छात्र संस्कृत का अध्ययन करते हैं। प्रख्यात इंडोलॉजिस्ट जी
जियालिन को संस्कृत को बढावा देने के लिए पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका
है।

योग की लोकप्रियता से बढी संस्कृत सीखने की चाहत

संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा २१ जून को अंताराष्ट्रिय योग दिवस घोषित करने
के बाद से चीन के लोगों में संस्कृत सीखने की इच्छा बढी है।

ओवर टाइम कर रहे
=========================

हांगजोऊ की कक्षा में ६ दिन संस्कृत पढऩे के लिए कई लोगों ने अवकाश लिया
है। कुछ ने सालाना मिलने वाली छुट्टियों का इस काम के लिए उपयोग किया है।
इतना ही नहीं कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने-अपने कार्यस्थल पर
ओवर टाइम किया है। कुछ ने दिन में होने वाली इस कक्षा में पढऩे के लिए
रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में काम करना शुरू कर दिया है।

योग में कुशलता के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी
===========================

अर्थशास्त्र में स्नातक और फिलहाल हांगजोऊ में योग प्रशिक्षक के रूप में
कार्यरत ३९ वर्षीय ही मिन का कहना है कि संस्कृत सीखने के लिए यह सुनहरा
मौका है। सारी दुनिया में योग करने वाले संस्कृत भाषा के जरिये ही
एक-दूसरे से संपर्क में रहते हैं, हालांकि कई योग पुस्तकें अंग्रेजी में
लिखी गई हैं लेकिन योग मुद्राओं के नाम और उच्चारण संस्कृत में ही है।

अध्यापकोंकी कमी
==================

तीन साल से संस्कृत पढ रही एक महिला ने बताया चूंकि इस भाषा को सिखाने के
लिए कोई पेशेवर प्रशिक्षक नहीं है इस लिए मुझे संस्कृत अब भी कठिन लग रही
है। उल्लेखनीय है कि चीन के स्कूलों ने ४० के दशक के अंत में संस्कृत
पढाना शुरू किया था , लेकिन शिक्षकों और समुचित पाठ्य पुस्तकों के अभाव में
पठन-पाठन का माहौल धीरे-धीरे विकसित हो सका।
==============================
===============================
हमारे सहयोगी पृष्ठः--
(1.) वैदिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/vaidiksanskrit
(2.) वैदिक साहित्य और छन्द
www.facebook.com/vedisanskrit
(3.) लौकिक साहित्य हिन्दी में
www.facebook.com/laukiksanskrit
(4.) संस्कृत निबन्ध
www.facebook.com/girvanvani
(5.) संस्कृत सीखिए--
www.facebook.com/shishusanskritam
(6.) चाणक्य नीति
www.facebook.com/chaanakyaneeti
(7.) संस्कृत-हिन्दी में कथा
www.facebook.com/kathamanzari
(8.) संस्कृत-काव्य
www.facebook.com/kavyanzali
(9.) आयुर्वेद और उपचार
www.facebook.com/gyankisima
(10.) भारत की विशेषताएँ--
www.facebook.com/jaibharatmahan
(11.) आर्य विचारधारा
www.facebook.com/satyasanatanvaidik
(12.) हिन्दी में सामान्य-ज्ञान
www.facebook.com/jnanodaya
(13.) संदेश, कविताएँ, चुटकुले आदि
www.facebook.com/somwad
(14.) उर्दू-हिन्दी की गजलें, शेर-ओ-शायरी
www.facebook.com/dilorshayari
(15.) अन्ताराष्ट्रिय कवि प्रवीण शुक्ल
www.facebook.com/kavipraveenshukla
(16.) वीर भोग्या वसुन्धरा
www.facebook.com/virbhogya
(17.) आर्यावर्त्त-गौरवम्
www.facebook.com/aryavartgaurav
(18.) संस्कृत नौकरी
www.facebook.com/sanskritnaukari
हमारे समूहः---
(1.) वैदिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/www.vaidiksanskrit
(2.) लौकिक संस्कृत
https://www.facebook.com/groups/laukiksanskrit
(3.) ज्ञानोदय
https://www.facebook.com/groups/jnanodaya
(4.) नीतिदर्पण
https://www.facebook.com/groups/neetidarpan
(5.) भाषाणां जननी संस्कृत भाषा
https://www.facebook.com/groups/bhashanam
(6.) शिशु संस्कृतम्
https://www.facebook.com/groups/bharatiyasanskrit
(7.) संस्कृत प्रश्नमञ्च
https://www.facebook.com/groups/sanskritprashna
(8.) भारतीय महापुरुष
https://www.facebook.com/groups/bharatiyamaha
(9.) आयुर्वेद और हमारा जीवन
https://www.facebook.com/groups/vedauraaryurved
(10.) जीवन का आधार
https://www.facebook.com/groups/tatsukhe
(11.) आर्यावर्त्त निर्माण
https://www.facebook.com/groups/aaryavartnirman
(12.) कृण्वन्तो विश्वमार्यम्
https://www.facebook.com/groups/krinvanto
(13) कथा-मञ्जरी
https://www.facebook.com/groups/kathamanzari
(14.) आर्य फेसबुक
https://www.facebook.com/groups/aryavaidik
(15.) गीर्वाणवाणी
https://www.facebook.com/groups/girvanvani
(16) वीरभोग्या वसुन्धरा
https://www.facebook.com/groups/virbhogya
(17.) चाणक्य नीति को पसन्द करने वाले मित्र
https://www.facebook.com/groups/chaanakyaneeti/
(18.) वैदिक संस्कृत मित्र
https://www.facebook.com/groups/vedicsanskrit/
(19.) कुसुमाञ्जलिः
https://www.facebook.com/groups/kusumanjali/